BHU के रिटायर्ड प्रोफेसर से 16.2 लाख की साइबर ठगी, पुलिस और ATS अधिकारी बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के 73 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर कथित तौर पर साइबर ठगी का शिकार हो गए। अहमदाबाद के एक वरिष्ठ नागरिक देखभाल केंद्र में रह रहे प्रोफेसर से साइबर अपराधियों ने पुलिस और एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के अधिकारी बनकर करीब 16.2 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने उन्हें लंबे समय तक WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए कथित तौर पर “डिजिटल अरेस्ट” में रखा।

मामले में साइबरक्राइम पुलिस ने शनिवार को FIR दर्ज की है। शिकायत के अनुसार, ठगी की शुरुआत 29 अगस्त को एक अनजान नंबर से आए फोन से हुई।

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पुलिस अधिकारी बनकर लगाया गंभीर आरोप

शिकायत के मुताबिक, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बनारस पुलिस मुख्यालय का अधिकारी बताया। उसने प्रोफेसर से कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक मोबाइल नंबर के जरिए ICICI बैंक में खाता खोला गया है और उस खाते से करोड़ों रुपये के कथित अवैध लेनदेन किए गए हैं।

साइबर ठगों ने प्रोफेसर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अवैध जुए से जुड़े मामलों में शामिल होने का भी आरोप लगाया। प्रोफेसर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित मोबाइल नंबर और बैंक खाता उनका नहीं है।

इसके बाद उन्हें बताया गया कि मामले की जांच ATS द्वारा की जाएगी।

WhatsApp वीडियो कॉल पर रखा गया निगरानी में

इसके कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए खुद को ATS इंस्पेक्टर बताया। आरोप है कि उसने प्रोफेसर को धमकाया कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

हालांकि, उनकी उम्र को देखते हुए आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि जांच वीडियो कॉल के माध्यम से की जाएगी। इसके बाद प्रोफेसर को लगातार WhatsApp पर संपर्क में रहने और किसी अन्य व्यक्ति को मामले की जानकारी नहीं देने के लिए कहा गया।

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उनसे बैंक खातों की जानकारी और अलग-अलग बयान भी लिए।

RBI के नाम पर कराया 16.2 लाख रुपये का ट्रांसफर

1 सितंबर को साइबर ठगों ने कथित तौर पर प्रोफेसर से कहा कि उनके बैंक खातों में मौजूद रकम की जांच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा की जानी है। इसके लिए उन्हें एक ICICI बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

प्रोफेसर ने कथित तौर पर अपने Union Bank of India और Bank of Baroda खातों से कुल 11 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

अगले दिन उनसे एक Yes Bank खाते में 5.2 लाख रुपये और जमा करने के लिए कहा गया। आरोपियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यह रकम RBI के पास सत्यापन के लिए जमा की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

ठगों ने कथित तौर पर WhatsApp पर एक फर्जी RBI रसीद भी भेजी।

फर्जी NIA सर्टिफिकेट भेजकर किया भरोसा

शिकायत के अनुसार, 9 सितंबर को आरोपियों ने प्रोफेसर को बताया कि जांच पूरी हो गई है। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी NIA (National Investigation Agency) नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी भेजा।

जब आरोपियों ने बाद में फोन और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया, तब प्रोफेसर को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और साइबरक्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई।

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क्या है डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड?

“डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, NIA, ATS या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी रखने, किसी से बात नहीं करने और कथित जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।

ध्यान रखें: कोई भी वास्तविक पुलिस या सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” करके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देती। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटें, 1930 पर साइबर अपराध की सूचना दें और नजदीकी साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

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