वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र स्थित नगवां में पेंटर सोनू यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब हत्या में बदल गया है। जिस घटना को शुरुआती दौर में आत्महत्या या दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा था, पुलिस जांच में वह सुनियोजित हत्या निकली। मामले में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक शोध छात्र को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश अभी जारी है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान बीएचयू के शोध छात्र गोपीचंद चौरेसिया के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि घटना के दौरान चली गोली से सोनू यादव की मौत हुई थी और बाद में साक्ष्य छिपाने की कोशिश भी की गई।
क्या था पूरा मामला?
10 जून को वाराणसी के नगवां इलाके में एक मकान में पेंटिंग का काम कर रहे 35 वर्षीय सोनू यादव का शव खून से लथपथ हालत में मिला था। उसके पास एक पिस्टल भी पड़ी थी। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध माना गया था क्योंकि आसपास रहने वाले लोगों ने गोली चलने की आवाज तक नहीं सुनी थी।
घटना के बाद पुलिस ने आत्महत्या, दुर्घटना और हत्या—तीनों पहलुओं से जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल के बाद मामला पूरी तरह नया मोड़ लेता गया।
पुलिस जांच में कैसे खुला राज?
जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले जिन्होंने घटना को संदिग्ध बना दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह था कि जिस कमरे में पेंटिंग का काम चल रहा था, वहां पिस्टल कैसे पहुंची? पुलिस ने मकान मालिक, किरायेदारों और आसपास के लोगों से पूछताछ की। इसके बाद घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है।
पुलिस का कहना है कि घटना के बाद सच्चाई छिपाने का प्रयास भी किया गया ताकि मामला आत्महत्या जैसा दिखाई दे।
गिरफ्तार आरोपी कौन है?
पुलिस ने बीएचयू के शोध छात्र गोपीचंद चौरेसिया को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि जिस मकान में पेंटिंग का कार्य चल रहा था, वहां अलग-अलग कमरों में छात्र किराए पर रहते थे। गोपीचंद भी उसी मकान में रह रहा था।
जांच में सामने आया कि घटना के समय वह घटनास्थल के आसपास मौजूद था और उसके बयान में कई विरोधाभास पाए गए। इसके बाद पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
दूसरे आरोपी की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार, इस मामले में एक और व्यक्ति की भूमिका सामने आई है। उसकी पहचान ऋषिकेश पांडेय के रूप में हुई है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि घटना के दौरान पिस्टल ऋषिकेश के पास थी। पुलिस का दावा है कि गोली चलने के बाद दोनों आरोपियों ने साक्ष्य छिपाने की कोशिश की और घटनास्थल को इस तरह दिखाने का प्रयास किया कि मामला आत्महत्या लगे।
फिलहाल पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा
सोनू यादव की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। रिपोर्ट में मिले तथ्यों ने पुलिस को यह मानने पर मजबूर किया कि मामला सामान्य नहीं है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शरीर पर मिले निशान और अन्य परिस्थितियां आत्महत्या के सिद्धांत से मेल नहीं खा रही थीं। इसी आधार पर जांच को हत्या की दिशा में आगे बढ़ाया गया।
घटना वाले दिन क्या हुआ था?
पुलिस जांच के मुताबिक, घटना वाले दिन सोनू यादव मकान में पेंटिंग का कार्य कर रहा था। उसी दौरान वहां मौजूद लोगों के बीच पिस्टल को लेकर घटनाक्रम हुआ। जांच में यह बात सामने आई कि पिस्टल से चली गोली सोनू यादव को लगी, जिससे उसकी मौत हो गई।
इसके बाद पूरे घटनाक्रम को छिपाने का प्रयास किया गया। हालांकि वैज्ञानिक जांच, तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने पुलिस को सच्चाई तक पहुंचा दिया।
परिवार ने पहले दिन से जताया था हत्या का शक
सोनू यादव के परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि घटनास्थल की परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं और कई सवाल ऐसे थे जिनका जवाब नहीं मिल रहा था।
परिजनों की मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। अब पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
बीएचयू का नाम आने से चर्चा में मामला
बीएचयू देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय के एक शोध छात्र का नाम हत्या के मामले में सामने आने से यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि यह मामला किसी शैक्षणिक गतिविधि से जुड़ा नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर हुई घटना के रूप में जांच के दायरे में है। पुलिस फिलहाल केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
पुलिस का आगे का कदम
पुलिस अब फरार आरोपी की गिरफ्तारी, घटना में इस्तेमाल हथियार की विस्तृत जांच और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के बाद घटना की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि गोली चलना दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
निष्कर्ष
वाराणसी के नगवां में हुई पेंटर सोनू यादव की मौत ने पांच दिनों के भीतर नया मोड़ ले लिया है। जिस घटना को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, पुलिस जांच में वह हत्या का मामला निकली। बीएचयू के शोध छात्र गोपीचंद चौरेसिया की गिरफ्तारी और दूसरे आरोपी की तलाश इस मामले को और गंभीर बना रही है।
अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य ही तय करेंगे कि इस हत्याकांड की पूरी कहानी क्या थी और दोषियों को क्या सजा मिलेगी।

