bhu-professor-research-paper-retracted-pakistan-bangladesh

पाकिस्तान-बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ प्रकाशित BHU प्रोफेसर के दो रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से हटे, शोध पर उठे सवाल

पाकिस्तान-बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ प्रकाशित BHU प्रोफेसर के दो रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से हटे

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर शोध कार्यों को लेकर चर्चा में है। इस बार विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर द्वारा पाकिस्तान और बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ किए गए दो संयुक्त शोध पत्र (Research Papers) अंतरराष्ट्रीय जर्नल से रिट्रैक्ट (Retract) कर दिए गए हैं। इन शोध पत्रों के हटने के बाद न केवल संबंधित शोध की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

रिट्रैक्शन डेटाबेस (Retraction Database) में इन दोनों शोध पत्रों और उनसे जुड़े वैज्ञानिकों का विवरण सार्वजनिक किया गया है। इनमें से एक शोध में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) सहित पाकिस्तान के पांच शोध संस्थानों की भागीदारी भी सामने आई है।

BHU Latest News by BHU Wale
BHU Latest News by BHU Wale

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, BHU के एक प्रोफेसर ने वर्ष 2022 और 2023 के दौरान बड़ी संख्या में शोध पत्र प्रकाशित किए। केवल दो वर्षों में 100 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित होने के कारण वे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक जगत में चर्चा का विषय बन गए थे।

इसी दौरान यह भी सामने आया कि उनके कुछ शोध पाकिस्तान, बांग्लादेश, चेक गणराज्य, सऊदी अरब और मलेशिया के वैज्ञानिकों एवं संस्थानों के साथ संयुक्त रूप से प्रकाशित हुए थे। अब इनमें से दो शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल द्वारा वापस ले लिए गए हैं।

किन विषयों पर हुआ था शोध?

रिट्रैक्ट किए गए दोनों शोध पत्र आधुनिक चिकित्सा और नैनो टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर आधारित थे।

पहला शोध

कार्बनिक अपशिष्ट जल (Organic Wastewater) के उपचार के लिए जिंक ऑक्साइड नैनोकणों पर कॉपर डोपिंग के प्रभाव का अध्ययन।

दूसरा शोध

नाक के माध्यम से दवा शरीर तक पहुंचाने (Nasal Drug Delivery) के लिए मोमेटासोन फ्यूरोएट युक्त मेसोपोरस नैनोकणों के डिजाइन पर आधारित शोध।

किन-किन देशों के संस्थान थे शामिल?

पहले शोध में भारत के अलावा पाकिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), बांग्लादेश और यूरोप के कई संस्थानों ने भाग लिया था।

पाकिस्तान के संस्थान

  • रिपाह इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, फैसलाबाद
  • राशिद लतीफ खान यूनिवर्सिटी, लाहौर
  • हजारा यूनिवर्सिटी, खैबर पख्तूनख्वा
  • यूनिवर्सिटी ऑफ आजाद जम्मू एंड कश्मीर (PoK)
  • बहाउद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी, मुल्तान

अन्य देशों के संस्थान

  • चित्कारा यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़
  • यूनिवर्सिटी ऑफ ह्राडेक क्रालोवे (चेक गणराज्य)
  • चार्ल्स यूनिवर्सिटी, प्राग
  • बीजीसी ट्रस्ट यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश
  • फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज
  • किंग अब्दुलअज़ीज़ यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब
  • यूनिवर्सिटी केबांगसान, मलेशिया

क्यों हटाए गए रिसर्च पेपर?

रिट्रैक्शन डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जर्नल और पब्लिशर की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • फोटो (Images) से संबंधित समस्याएं
  • शोध के परिणाम (Results) में विसंगतियां
  • निष्कर्ष (Conclusions) पर सवाल
  • डेटा की विश्वसनीयता को लेकर संदेह

बताया गया कि जांच के दौरान लेखकों ने कुछ आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं, लेकिन उसके बावजूद जर्नल ने दोनों शोध पत्र वापस लेने का निर्णय लिया।

पिछले पांच वर्षों में 75 शोध पत्र हो चुके हैं रिट्रैक्ट

यह पहली बार नहीं है जब BHU के शोध पत्रों पर सवाल उठे हों।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में BHU से जुड़े लगभग 75 रिसर्च पेपर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जर्नलों से हटाए जा चुके हैं।

इनमें कई मामलों में आरोप लगे थे कि—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से सामग्री तैयार की गई।
  • शोध में साहित्यिक चोरी (Plagiarism) हुई।
  • शोध से संबंधित तस्वीरों में हेरफेर किया गया।
  • डेटा की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठे।

2026 में BHU और IIT BHU के 10 शोध पत्र हटे

साल 2026 में BHU और IIT BHU से जुड़े कुल 10 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नलों से हटाए जा चुके हैं।

इनमें—

  • IIT BHU के 3 शोध पत्र
  • IMS BHU के 3 शोध पत्र
  • BHU के 4 शोध पत्र

शामिल बताए गए हैं।

एक मामले में तो किसी अमेरिकी वैज्ञानिक का नाम उसकी अनुमति के बिना शोध पत्र में शामिल कर दिया गया था। संबंधित वैज्ञानिक की शिकायत के बाद जर्नल ने वह शोध पत्र वापस ले लिया।

वहीं एक अन्य मामले में एमडी कर रहे चार रेजीडेंट डॉक्टरों ने बिना किसी कंसल्टेंट या प्रोफेसर के मार्गदर्शन के शोध पत्र प्रकाशित कर दिया, जिसे बाद में हटा दिया गया।

तीन साल पहले पाकिस्तान से मांगा गया था मालवीय धान का बीज

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग तीन वर्ष पहले पाकिस्तान के एक नागरिक ने BHU के कृषि वैज्ञानिक प्रो. एस.के. सिंह से मालवीय धान के बीज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

प्रो. सिंह ने बीज देने से स्पष्ट इनकार करते हुए उन्हें पाकिस्तान स्थित संबंधित कृषि अनुसंधान संस्थान से संपर्क करने की सलाह दी। बताया गया कि बाद में कई बार फोन और व्हाट्सएप संदेश भेजे गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन की नजर में मामला

सूत्रों के अनुसार, संबंधित प्रोफेसर पहले से ही विश्वविद्यालय प्रशासन की निगरानी में हैं। दो वर्षों में बड़ी संख्या में प्रकाशित शोध पत्रों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। अब दो शोध पत्रों के रिट्रैक्ट होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

हालांकि, इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

रिसर्च रिट्रैक्शन क्यों होता है?

किसी भी शोध पत्र को जर्नल द्वारा Retract (वापस लेना) तब किया जाता है जब जांच में यह पाया जाए कि—

  • शोध डेटा विश्वसनीय नहीं है।
  • वैज्ञानिक प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि हुई है।
  • प्लेजरिज्म या शोध नैतिकता का उल्लंघन हुआ है।
  • चित्रों या आंकड़ों में हेरफेर की गई है।
  • लेखक या संस्थान द्वारा गलत जानकारी दी गई है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि रिट्रैक्शन का अर्थ हमेशा धोखाधड़ी साबित होना नहीं होता, बल्कि कई मामलों में गंभीर त्रुटियों या वैज्ञानिक मानकों का पालन न होने के कारण भी शोध पत्र वापस लिए जाते हैं।

निष्कर्ष

पाकिस्तान और बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ प्रकाशित BHU प्रोफेसर के दो शोध पत्रों का अंतरराष्ट्रीय जर्नल से हटाया जाना विश्वविद्यालय की शोध प्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और शोध गुणवत्ता सुनिश्चित करना किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थानों की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस पूरे मामले को और स्पष्ट करेगी।

📢 BHU की लेटेस्ट न्यूज़ और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

FAQs

Q1. BHU के कितने शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल से हटाए गए हैं?

हालिया मामले में एक प्रोफेसर के दो शोध पत्र हटाए गए हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में लगभग 75 शोध पत्र विभिन्न कारणों से रिट्रैक्ट किए जा चुके हैं।

Q2. शोध पत्र क्यों हटाए गए?

जांच में फोटो संबंधी समस्याएं, परिणामों और निष्कर्षों में विसंगतियां तथा अन्य शोध संबंधी अनियमितताएं सामने आने के बाद इन्हें हटाया गया।

Q3. किन देशों के वैज्ञानिक इस शोध में शामिल थे?

भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, चेक गणराज्य, सऊदी अरब और मलेशिया के शोध संस्थान शामिल थे।

Q4. क्या विश्वविद्यालय ने कोई आधिकारिक कार्रवाई की है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामला प्रशासन की जानकारी में है, लेकिन किसी आधिकारिक कार्रवाई की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

Q5. रिट्रैक्शन का क्या मतलब होता है?

रिट्रैक्शन का अर्थ है कि प्रकाशित शोध पत्र को वैज्ञानिक या नैतिक कारणों से जर्नल द्वारा आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *