BHU IMS Anti Ragging News

BHU IMS में रैगिंग के नाम पर छात्रों से ठगी! फर्जी शिकायत की धमकी देकर ऐंठे रुपये, जांच में जुटा प्रशासन

BHU IMS में रैगिंग के नाम पर ठगी का मामला, फर्जी शिकायत की धमकी देकर छात्रों से वसूले रुपये

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (IMS) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रैगिंग की फर्जी शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर छात्रों से पैसे वसूलने के दो मामले सामने आए हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद BHU एंटी रैगिंग कमेटी, विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

जांच में यह भी सामने आया कि शिकायत करने वाली युवती ने अपनी पहचान गलत बताई थी और जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी, वह बिहार में सक्रिय पाया गया। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।

BHU Latest News by BHU Wale
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एंटी रैगिंग कमेटी के पास पहुंचे दो संदिग्ध मामले

बीएचयू एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान कमेटी के पास दो ऐसे मामले आए, जिनमें छात्रों को रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर रुपये मांगे गए।

जांच के दौरान पता चला कि शिकायत करने वाली युवती ने अपनी पहचान भी फर्जी बताई थी। इससे स्पष्ट हुआ कि शिकायत का उद्देश्य वास्तविक रैगिंग की सूचना देना नहीं, बल्कि छात्रों से पैसे ऐंठना था।

खुद को रेजिडेंट डॉक्टर बताकर की गई शिकायत

शनिवार रात प्रो. ललित मोहन अग्रवाल को एक युवती का फोन आया। उसने स्वयं को IMS के गायनेकॉलोजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर बताते हुए आरोप लगाया कि मेडिसिन विभाग के एक छात्र और उसके साथियों ने रैगिंग के नाम पर उसके साथ छेड़छाड़ की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रो. अग्रवाल ने तुरंत गायनेकॉलोजी विभागाध्यक्ष से संपर्क किया।

जब विभागीय स्तर पर जांच हुई तो पता चला कि उस नाम की कोई भी रेजिडेंट डॉक्टर विभाग में मौजूद ही नहीं है।

यहीं से पूरे मामले पर संदेह गहरा गया।

छात्र ने बताया- पहले भी दो हजार रुपये ले चुकी थी युवती

इसके बाद संबंधित छात्र से पूछताछ की गई।

छात्र ने बताया कि वही युवती पहले भी उसे फोन कर चुकी थी और रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर उससे 2,000 रुपये वसूल चुकी थी।

बाद में युवती ने दोबारा अधिक रुपये की मांग शुरू कर दी। जब छात्र ने पैसे देने से इनकार किया, तब उसने एंटी रैगिंग कमेटी में शिकायत दर्ज करा दी।

एक और छात्र भी बना ठगी का शिकार

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी तरीके से एक अन्य छात्र से भी रुपये वसूले गए थे।

हालांकि दूसरा छात्र अभी तक सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि वह बदनामी और अनावश्यक विवाद के डर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से बच रहा है।

प्रशासन का मानना है कि यदि छात्र खुलकर शिकायत करेंगे, तो ऐसे मामलों पर जल्द कार्रवाई संभव होगी।

लंका थाना पुलिस ने शुरू की जांच

मामले में मेडिसिन विभाग के छात्र ने लंका थाने में लिखित शिकायत दी है।

लंका थाना प्रभारी राजकुमार के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी, वह किसी युवती के नाम पर है, लेकिन फिलहाल नंबर बंद है। पुलिस के अनुसार यह नंबर बिहार में सक्रिय पाया गया था।

अब पुलिस मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

IMS निदेशक को भी दी गई जानकारी

पूरे घटनाक्रम की जानकारी IMS के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार को भी दे दी गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और एंटी रैगिंग कमेटी संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो नहीं है या फिर यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत ठगी की कोशिश थी।

छात्रों से एंटी रैगिंग कमेटी की अपील

एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल ने सभी छात्रों से अपील की है कि—

  • यदि कोई व्यक्ति रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो घबराएं नहीं।
  • किसी भी अनजान व्यक्ति को रुपये न दें।
  • ऐसी किसी भी घटना की तुरंत सूचना एंटी रैगिंग कमेटी, संस्थान प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें।
  • बदनामी के डर से मामले को छिपाने के बजाय समय रहते शिकायत करें।

उन्होंने कहा कि छात्रों की जागरूकता ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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निष्कर्ष

बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में सामने आया यह मामला केवल फर्जी शिकायत का नहीं, बल्कि रैगिंग कानून का दुरुपयोग कर छात्रों से पैसे ऐंठने का गंभीर मामला है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस दोनों इसकी जांच में जुटे हैं।

यह घटना छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख भी है कि किसी भी प्रकार की धमकी या ब्लैकमेलिंग के सामने झुकने के बजाय तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। इससे न केवल अपराधियों पर कार्रवाई होगी बल्कि भविष्य में अन्य छात्र भी ऐसी ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे।

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