बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। BHU और वाराणसी स्मार्ट सिटी के बीच हुई साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय परिसर में ऐप आधारित पब्लिक साइकिल और ई-बाइक शेयरिंग नेटवर्क शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के शुरू होने के बाद छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और विश्वविद्यालय आने वाले आगंतुक मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से ई-बाइक या साइकिल किराये पर लेकर पूरे परिसर में यात्रा कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस सुविधा को अगस्त 2026 के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या होगी नई सुविधा?
नई व्यवस्था के तहत BHU परिसर में GPS से लैस साइकिल और हाई-कैपेसिटी ई-बाइक उपलब्ध कराई जाएंगी। इनका उपयोग करने के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जाएगा, जिसमें यूजर रजिस्ट्रेशन और उपयोग के आधार पर भुगतान (User-Based Payment System) की सुविधा होगी।
इस डिजिटल सिस्टम की मदद से उपयोगकर्ता आसानी से नजदीकी स्टेशन से बाइक या साइकिल लेकर अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे।
BHU परिसर में बनेंगे डॉकिंग स्टेशन
परियोजना के पहले चरण में विश्वविद्यालय परिसर के प्रमुख और अधिक भीड़ वाले स्थानों पर डॉकिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। यहां से उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार साइकिल या ई-बाइक ले सकेंगे और यात्रा पूरी होने के बाद किसी भी निर्धारित स्टेशन पर वापस जमा कर सकेंगे।
पहले चरण में दो प्रकार के वाहन उपलब्ध होंगे—
- हाई-कैपेसिटी ई-बाइक
- सामान्य पैडल साइकिल
इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी आवश्यकता और दूरी के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी।
GPS ट्रैकिंग से होगी निगरानी
सुरक्षा और बेहतर संचालन को ध्यान में रखते हुए सभी ई-बाइक और साइकिल में Live GPS Tracking System लगाया जाएगा। यह प्रणाली वाराणसी शहर के Integrated Command and Control Centre (ICCC) से जुड़ी रहेगी।
इससे वाहनों की वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी की जा सकेगी और सेवा को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
छात्रों और कर्मचारियों को होगा लाभ
BHU का परिसर काफी विस्तृत है, जहां विभिन्न संकाय, छात्रावास, पुस्तकालय, अस्पताल और प्रशासनिक भवन एक-दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में यह सेवा छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए परिसर के भीतर आवागमन को अधिक आसान बनाएगी।
इस पहल से—
- परिसर में सुविधाजनक आवागमन संभव होगा।
- मोटर वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
- प्रदूषण में कमी आएगी।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहन मिलेगा।

कुलपति ने क्या कहा?
BHU के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने इस पहल को विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक विकास और जनकल्याण में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ यह साझेदारी BHU के सकारात्मक सामाजिक योगदान का विस्तार है। यह नई परिवहन व्यवस्था परिसर में आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाएगी तथा टिकाऊ (Sustainable) परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देगी।
व्यापक सहयोग का हिस्सा है यह परियोजना
यह पहल BHU और वाराणसी नगर निगम के बीच चल रहे व्यापक सहयोग का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत ऐसे विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है जो शहर और विश्वविद्यालय दोनों के लिए लाभकारी हों।
यह परियोजना BHU की सतत विकास (Sustainability), सामुदायिक कल्याण (Community Welfare) और सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Outreach) के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
निष्कर्ष
BHU और वाराणसी स्मार्ट सिटी की यह संयुक्त पहल विश्वविद्यालय परिसर में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगस्त 2026 के अंत तक शुरू होने वाली यह ऐप आधारित ई-बाइक और साइकिल शेयरिंग सेवा न केवल छात्रों और कर्मचारियों के लिए आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि हरित परिवहन को भी बढ़ावा देगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। अधिक जानकारी के लिए BHU Wale पेज को फॉलो करें।
FAQ
Q1. BHU में ई-बाइक शेयरिंग सेवा कब शुरू होगी?
उत्तर: विश्वविद्यालय के अनुसार यह सुविधा अगस्त 2026 के अंत तक शुरू किए जाने की योजना है।
Q2. इस सेवा का उपयोग कौन कर सकेगा?
उत्तर: छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और विश्वविद्यालय परिसर में आने वाले आगंतुक इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
Q3. भुगतान कैसे किया जाएगा?
उत्तर: उपयोगकर्ताओं को एक मोबाइल ऐप के माध्यम से उपयोग के आधार पर भुगतान करना होगा।
Q4. क्या सभी बाइक GPS से लैस होंगी?
उत्तर: हाँ, सभी ई-बाइक और साइकिल में लाइव GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा।

