वाराणसी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU) में नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं की ड्रग स्क्रीनिंग कराई जाएगी। संस्थान प्रशासन ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बीटेक, एमटेक, इंटीग्रेटेड ड्यूल डिग्री (IDD) और पीएचडी समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले 2250 से अधिक विद्यार्थियों की यूरिन आधारित ड्रग जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए संस्थान की ओर से नौ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें IIT-BHU के प्रोफेसरों के साथ IMS-BHU के डॉक्टर भी शामिल हैं।
कुलसचिव कार्यालय के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। समिति नए विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग और जांच की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के बैच के हिसाब से जल्द ही सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
IIT-BHU में पहली बार होगी नए छात्रों की ड्रग स्क्रीनिंग
IIT-BHU में इस शैक्षणिक सत्र से नए दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की ड्रग जांच कराने की तैयारी है। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, सभी नए प्रवेशित छात्र-छात्राओं को इस स्क्रीनिंग के दायरे में रखा जाएगा।
इस सत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बीटेक में करीब 1550 विद्यार्थियों के दाखिला लेने की संभावना है। वहीं, एमटेक, IDD, पीएचडी और अन्य पाठ्यक्रमों में 700 से अधिक विद्यार्थी प्रवेश ले रहे हैं।
इस तरह कुल 2250 से अधिक विद्यार्थियों की यूरिन आधारित जांच की योजना बनाई गई है। जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए बैच के अनुसार सैंपल एकत्र करने की तैयारी की जा रही है।
नौ सदस्यीय समिति करेगी ड्रग टेस्ट की निगरानी
नए छात्रों की ड्रग स्क्रीनिंग को सुचारु रूप से संचालित करने और जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए IIT-BHU ने नौ सदस्यीय समिति बनाई है। समिति में संस्थान के शिक्षकों और IMS-BHU के चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
प्रो. राजेश कुमार को मिली समिति की अध्यक्षता
समिति की अध्यक्षता डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. राजेश कुमार करेंगे। समिति में शामिल अन्य सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं:
समिति की जिम्मेदारी नए विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी करना है। चिकित्सा विशेषज्ञों की भागीदारी से जांच के परिणामों को समझने और आवश्यक चिकित्सकीय आकलन करने में मदद मिल सकती है।
गांजा, कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों की हो सकती है जांच
यूरिन आधारित ड्रग टेस्ट के माध्यम से गांजा, कोकीन, ओपिओइड्स और कुछ सिंथेटिक ड्रग्स सहित विभिन्न पदार्थों के सेवन के संकेतों की जांच की जा सकती है। हालांकि, जांच में किन पदार्थों की पहचान होगी, यह इस्तेमाल किए जाने वाले टेस्ट और उसकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर करता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम आने का अर्थ हमेशा किसी पदार्थ के सेवन की अंतिम पुष्टि नहीं होता। कुछ दवाएं भी जांच के परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय इतिहास की समीक्षा और पुष्टि करने वाले अतिरिक्त परीक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।
यदि कोई विद्यार्थी डॉक्टर की सलाह पर ऐसी दवा ले रहा है, जो जांच के परिणाम को प्रभावित कर सकती है, तो उसे संबंधित चिकित्सा टीम को इसकी जानकारी देनी चाहिए। जांच के नतीजों की व्याख्या उचित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए।
नशामुक्त परिसर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल पर जोर
IIT-BHU में नए विद्यार्थियों की ड्रग स्क्रीनिंग की तैयारी को परिसर में सुरक्षित और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है। उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से जुड़े विषयों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत सभी नए प्रवेशित विद्यार्थियों की जांच कराने की योजना है। नौ सदस्यीय समिति इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी, जबकि सैंपल लेने की प्रक्रिया छात्रों के बैच के अनुसार शुरू किए जाने की तैयारी है।
हालांकि, जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट आने की स्थिति में विद्यार्थियों के दाखिले को रद्द करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई करने या अन्य कदम उठाने के संबंध में फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस विषय में किसी भी अंतिम निर्णय या कार्रवाई के नियमों को लेकर संस्थान की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना जरूरी है।
छात्रों के लिए क्या है महत्वपूर्ण?
IIT-BHU में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों के लिए इस प्रस्तावित व्यवस्था से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। जांच की तारीख, सैंपल लेने की प्रक्रिया, आवश्यक निर्देश और पॉजिटिव रिपोर्ट की स्थिति में लागू होने वाले नियमों के बारे में संस्थान की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को ही अंतिम माना जाना चाहिए।
विद्यार्थियों को किसी भी दवा के सेवन या चिकित्सकीय स्थिति से जुड़ी प्रासंगिक जानकारी जांच करने वाली चिकित्सा टीम को सही तरीके से उपलब्ध करानी चाहिए। इससे जांच के परिणामों का उचित मूल्यांकन करने में सहायता मिल सकती है।
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निष्कर्ष
IIT-BHU में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान 2250 से अधिक विद्यार्थियों की यूरिन आधारित ड्रग स्क्रीनिंग कराने की तैयारी है। इसके लिए प्रो. राजेश कुमार की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें IIT-BHU के शिक्षकों और IMS-BHU के चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। अब छात्रों के बैच के अनुसार जांच की प्रक्रिया शुरू होने और इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार है।
नोट: ड्रग टेस्ट से संबंधित अंतिम प्रक्रिया, तारीखों और संभावित कार्रवाई के नियमों की पुष्टि IIT-BHU की आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए।