बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ चुनाव को लेकर उठ रही मांगों के बीच अब BHU में भी छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने और निर्वाचित छात्रसंघ बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों ने 27 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
छात्रसंघ भवन परिसर में डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) कार्यालय के बाहर चल रहे इस धरने में छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द चुनाव कराने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि पिछले करीब तीन दशक से विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की सामूहिक समस्याओं और मांगों को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कोई मजबूत लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध नहीं है।
BHU में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर क्यों शुरू हुआ धरना?
BHU में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों ने पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। इसमें 27 अक्टूबर तक सकारात्मक जवाब देने या छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग की गई थी।
छात्रों के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा तक प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का फैसला लिया।
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि चुनाव में संभावित विवाद या हिंसा की आशंका के आधार पर छात्रसंघ को बंद रखना उचित नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्धारित नियमों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।
छात्र संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर छात्र भूख हड़ताल भी शुरू कर सकते हैं।
BHU में आखिरी बार कब हुआ था छात्रसंघ चुनाव?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन पिछले लगभग 30 वर्षों से यहां नियमित निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था नहीं है।
BHU में आखिरी पूर्ण छात्रसंघ चुनाव वर्ष 1996 में हुआ था। इसके बाद फरवरी 1997 में विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की घटना के बाद छात्रसंघ भंग कर दिया गया।
इसके बाद वर्ष 2011-12 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र परिषद (Student Council) का गठन किया था। हालांकि, यह व्यवस्था लगभग एक साल बाद समाप्त हो गई।
वर्ष 2014 में भी छात्र परिषद के गठन की पहल की गई, लेकिन छात्रों के अनुसार, इस व्यवस्था में सीधे चुनाव के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधियों की भूमिका नहीं थी।
इसी वजह से छात्र संगठन लंबे समय से विश्वविद्यालय में प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से निर्वाचित छात्रसंघ बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने की मांग
BHU के छात्र संगठनों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं।
लिंगदोह समिति की सिफारिशें देश के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव को पारदर्शी, निष्पक्ष और अनुशासित तरीके से आयोजित करने के लिए बनाई गई थीं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव कराने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करनी चाहिए, ताकि लंबे समय से लंबित छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा हल हो सके।
इसके अलावा, जब तक निर्वाचित छात्रसंघ बहाल नहीं होता, तब तक छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की एक संयुक्त समिति बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इस समिति के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं और मांगों पर चर्चा की जा सकती है।
हॉस्टल की सुविधाओं और छात्राओं पर पाबंदियों का मुद्दा भी उठा
छात्रसंघ चुनाव की मांग के साथ धरने पर बैठे छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर की कई बुनियादी समस्याओं को भी उठाया है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं।
हॉस्टल में पीने के साफ पानी की उपलब्धता।
छात्रावासों में अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति।
छात्राओं के हॉस्टल से रात 10 बजे के बाद बाहर निकलने पर लगी पाबंदियां।
विद्यार्थियों की सामूहिक समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था।
छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्रसंघ होने से विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और मांगों को एक संगठित मंच के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
BHU ने बनाई थी Coordination Committee on Student Matters
गौरतलब है कि अक्टूबर 2026 में BHU प्रशासन ने विद्यार्थियों की सामूहिक शिकायतों और मांगों पर चर्चा करने के उद्देश्य से Coordination Committee on Student Matters का गठन किया था।
इस समिति का उद्देश्य छात्र मामलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और समन्वय स्थापित करना है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि ऐसी समिति निर्वाचित छात्रसंघ का विकल्प नहीं हो सकती।
उनकी मुख्य मांग है कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत प्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएं और विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिले।
AMU में 5 नवंबर को छात्रसंघ चुनाव, जामिया में भी उठी बहाली की मांग
BHU में छात्रसंघ चुनाव की मांग के बीच देश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह मुद्दा चर्चा में है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में 5 नवंबर 2026 को छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा की गई है। वहीं, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की समय-सीमा तय करने को लेकर मांगें उठ रही हैं।
ऐसे में BHU में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना छात्र राजनीति और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।
क्या BHU में फिर से बहाल होगा छात्रसंघ?
BHU में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 1996 के बाद से विश्वविद्यालय में पूर्ण निर्वाचित छात्रसंघ नहीं होने के कारण यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है।
फिलहाल छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव की तारीख घोषित करने और निर्वाचित छात्रसंघ बहाल करने की मांग पूरी होने तक उनका धरना जारी रहेगा।
अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और क्या BHU में करीब तीन दशक बाद एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो पाता है।
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